प्रिय जनो,
स्वयं को जान लेना ही जीवन का परम लक्ष्य हो सकता है। और इसे पाने के लिये ही धर्म की उपयोगिता है।
मनुष्य मात्र की जीवन यात्रा पशुता से भगवत्ता की ओर ही होनी चाहिये। धर्म हमें पशुता से देवत्व की ओर उठने में सहायक होता है।
हमारे देश का दुर्भाग्य है कि धर्म को राजनीति ने अपना घातक हथियार बना रखा है।
और हमारे देखे आज नहीं, मुल्ला जवाहरलाल के समय से ही यही चला आ रहा है। हिंदुत्व की बात करने वाले को सांप्रदायिक कह के निंदित किया गया।
हिंदू-विरोधी को सेक्यूलरवादी कह कर पुरुष्कृत किया गया है। परिणाम स्वरूप मनुष्य की चेतना को समझने संबंधी गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
परंतु आज यह दुष्ट सेक्यूलरवाद बहुत बेचैन नजर आ रहा है।
आशा है हम जागेंगे और इस धूर्त अहंकारी सेक्यूलरवाद कोअपने देश से उखाड़ फेंकेंगे।
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हर हर महादेव !!!
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मौत वही छीन सकती है, जो जन्म ने दिया। उसके पार जो है, वह मौत के बाहर है। और जो मौत के बाहर है, वही अमृत है। और जो मौत के बाहर है वही परमात्मा है।
एक धन है, जो बाहर खोजने से मिलता है। और बड़ी मुश्किल से मिलता है; खोजे-खोजे मिलता है; और वह भी सबको नहीं एकाध को मिलता है। और आश्चर्य की बात
यह है कि जिनको मिलता है, उनसे भी मौत वापस ले लेती है।
जो इसके प्रति जाग जाये, समझ जाये, यह होश जिसे आ जाये—उसके जीवन में एक क्रांति पैदा होती है। उसके जीवन में एक नयी यात्रा शुरू होती है। उस नयी यात्रा का नाम ही धर्म है। उसी को हम खोजते भटकते फिर रहे हैं।
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है नसीमे-सुबह आवारा उसी के नाम पर
बू-ए-गुल ठहरी हुई है जिस कली के नाम पर
कुछ न निकला दिल में दागे-हसरते-दिल के सिवा
हाय क्या-क्या तोहमतें थी आदमी के नाम पर
फिर रहा हूं कू-ब-कूं जंजीरे-रुसवाई लिये
है तमाशा सा तमाशा जिंदगी के नाम पर
अब ये आलम है कि हर पत्थर से टकराता हूं सर
मार डाला एक बुत ने बंदगी के नाम पर
कुछ इलाज उनका भी सोचा तुमने ऐ चारागरो
वो जो दिल तोड़े गये हैं दिलबरी के नाम पर
कोई पूछे मेरे गमख्वारों से तुमने क्या किया
खैर उसने दुश्मनी की दोस्ती के नाम पर
कोई पाबंदी से हंसने पर न रोना जुर्म है
इतनी आजादी तो है दीवानगी के नाम पर
आप ही के नाम से पाई है दिल ने जिंदगी
खत्म होगा अब ये किस्सा आप ही के नाम पर
कारवाने-सुबह यारो कौन सी मंजिल में है
मैं भटकता फिर रहा हूं रौशनी के नाम पर।
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[ॐ नम: शिवाय॥]
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