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*यूं अचानक मुलाकात तुझसे हुई
जैसे राहगीर को
बे-तलब
बे-दुआ
राह में एक अनमोल मोती मिले।
और हंगामे-रुख्सत ये एहसास है
जैसे मर्देजफा कस का आंदोलन
हासिले-मेहनते जिंदगी
राहजन छीन न लें
जैसे जाहिद को पीरों में एहसास हो
उम्रभर की रयाजत अकारत गई।
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जिंदगी भर की तपश्चर्या व्यर्थ हो गयी। जिसने जिंदगी भर उपवास किये हों, प्रार्थनाएं की हों, पूजाएं की हों, उसको जैसे लगे कि सारी जिंदगी की मेहनत दो कौड़ी में गयी। या जैसे किसी कंजूस ने जिंदगी भर श्रम करके पैसा इकट्ठा किया हो और राह में लुटेरे लूट लें।
प्रभु आता है, तो ऐसा लगता है: बिना मांगे आ गया। और जाता है, तो ऐसा लगता है—सब लुट गया।
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