Tuesday, July 8, 2014

*मधु का प्याला*

कभी-कभी तो,
एक हवा का शीतल झौंका,
किसी सुबह तो,
तुम्हें जगाता होगा?

और चांद की शीतल किरणें,
कभी-कभी तो---लोरी गाकर,
तुम्हें सुलाती होंगी!

घोर निशा के निविड़ तिमिर में,
टिमटिम तारे---
कभी देख तो पाते होगे...

प्रिय की मुस्कानों का जादू
कभी हृदय पर चलता तो होगा?

मेरे देखे, आज कहूं मैं,
वहीं कहीं पर राज छुपा है---
वहीं कहीं पर होश छिपा है---
बाकी तो सब बेहोशी है।

बुद्धि के प्रपंच निराले,
ज्ञानी भटके, मूरख पहुंचे ...
पी-पी कर मधु का प्याला...

जब दिल से कोई हूक उठे-या
उस पर कोई ठोकर आए,
बुद्धि सिमट कर एक तरफ जब
दूर खड़ी हो जाए...

तभी जागना
नहीं चूकना तब यदि
छलके मधु का प्याला
हो जाना पी-पी कर मतवाला।
...
(dada64)

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